1.
डाउन सिंड्रोम क्या हैं ?
डाउन सिंड्रोम एक जेवकीय (Genetic जेनेटिक) बीमारी हैं, जिसका मुख्य लक्षण मंद्बुधि हैं | यह मंद्बुधि
बच्चों का सबसे प्रमुख कारण हैं | मंद्बुधि के अलावा इन बच्चों में दिल और आँत की
गंभीरबीमारियाँ हो सकती हैं | इनकी चेहरे की बनावट मंगोल, जाति के लोगो से मिलती
हैं | इसलिए इन्हें मंगोल बेबी बी कहा जाता था |
यहाँ गुणसूत्रों (chromosomes) की ख्रभी से होता हैं| डाउन सिंड्रोम के व्यक्तियो में २१
नंबर क गुणसूत्रों की २ कापि या होने के बदले ३ कापिया होती हैं |
2.
क्या डाउन सिंड्रोम का उपचार संभव
हैं ?
नहीं ! डाउन सिंड्रोम ठीक नही किया
जा सकता हैं | दिल और आँत की बनावटी गड़बड़
को ऑपरेशन के द्वारा ठीक किया जा सकता हैं
3.
डाउन सिंड्रोम में मंद्बुधि कितनी
गंभीर होती हैं ?
डाउन सिंड्रोम के बच्चों की आई
क्यू (IQ) सामान्यत: 40-60% तक होता हैं | ये बच्चे चलना, बोलना इत्यादि काम आम बच्चों की तुलना देर से
सीखते हैं | अथार्त बड़े होने पर वे लोग साधारण भाषा में बात कर सकंगे तथा घर पर
अपनी देखभाल खुद कर सकते हैं | यह किसी की निगरानी में साधारण काम कर सकते हैं |
वे ज़िन्दगी की बहुत सारी जवाबदेही का वहन नहीं कर सकते | उन्हें जीवन भर सहायता
एवं निगरानी की जरुरत हैं |
4.
सामान्यत: आबादी में डाउन सिंड्रोम
से पीड़ित बच्चे होने का खतरा क्या हैं ?
पूरी आबादी में 800 बच्चे में से एक को सिंड्रोम होता
हैं | यह खतरा माँ की आयु क साथ बढ़ता हैं | तथा 35 वर्ष की आयु से ऊपर यह खतरा 350 में एक हो जाता है |
5.
क्या मेरे होने वाले बसह को डाउन
सिंड्रोम हो सकता हैं?
हाँ, किसी भी माँ को डाउन सिंड्रोम
से पीड़ित बच्चा हो सकता हैं | अधिकांश डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे उन माताओं को होता
हैं जिनके परिवार में एक बच्चे को डाउन सिंड्रोम नहीं हैं |
6.
क्या डाउन सिंड्रोम का खतरा जब भी
हैं, जबकि परिवार में एक बच्चे को डाउन सिंड्रोम नहीं हैं ?
हाँ, डाउन सिंड्रोम का खतरा तब भी
हैं, जबकि परिवार में एक भी बच्चा इस बीमारी से ग्रसित नहीं हैं |
7.
क्या जन्म से पहेले गर्भ में इस
बीमारी की जाँच संभव हैं ?
हाँ, गर्भवस्था के दौरान डबल
मार्कर तथा ट्रिपल टेस्ट नाम की जाँच के द्वारा पता लगया जा सकता हैं कि गर्भस्थ
शिशु में डाउन सिंड्रोम का खतरा अधिक तो नही हैं |
8.
ट्रिपल टेस्ट क्या हैं ?
क्वाड्रिपल टेस्ट क्या हैं ?
इस टेस्ट में माँ के खून से तीन
प्रकार की जाँचे – (AFP, B-HCG, Serum Oestriol) होती हैं | इन पर आधारित गणना क दवरा खतरे का पता लगया जाता
हैं | यह टेस्ट गर्भ के सोल्वे हफ्ते में किया जाता हैं | क्वाड्रिपल टेट में
इन्हिबिन ए (Inhibin A) नामक और एक जाँच होती हैं | ट्रिपल टेस्ट से लगभग 60-65 प्रतिशत डाउन सिंड्रोम के
बच्चे के पकड़ में आते हैं | क्वाड्रिपल टेस्ट से इससे अधिक डाउन सिंड्रोम के केस
पकड़ में आते हैं | लेकिन ये जानना जरुरी हैं की ट्रिपल टेस्ट और क्वाड्रिपल टेस्ट
नेगेटिव होने के बावजूद डाउन सिंड्रोम का बच्चा पैदा हो सकता हैं |
9.
इस टेस्ट का करने का उचित समय क्या
हैं ?
यह टेस्ट गर्भवस्था के 15 से 17 हफ्ते (15 to 17 weeks of Pregnancy) में किया जाता हैं | खून की जाँच
देने वे पहेले अल्ट्रासाउंड द्वारा गर्भावस्थ शिशु के गर्भ की आयु अनमानित की जाती
हैं |
10. क्या डाउन सिंड्रोम के लिए 15 हफ्ते से पहले कोई जाँच की जा सकती
हैं ?
जी , ट्रिपल टेस्ट की तरह डाउन सिंड्रोम के लिए 11 से 14 हफ्ते में डबल मार्कर
टेस्ट होता हैं | डबल मार्कर टेस्ट में माँ के खून में बीटा एचसीजी ( HCG )
और PAPP A नामक त्तवों की जाँच
होती हैं | इस जाँच के साथ गर्भ के गर्दन पर सूजन (nuchal thickness) तथा
गर्भ के अन्य अंगों की अल्ट्रासाउंड से जाँच होती हैं | इन सब जाँचों से गर्भ से
डाउन सिंड्रोम होने की सम्भावना का अनुमान लगया जा सकता हैं | अगर यह सम्भावना 250
में एक से अधिक हो थो गर्भ की कैरियोटाईप या फिश (Fish) जाँच करनी आवश्यक
होगी | सिर्फ कैरियोटाईप या फिश जाँच से यह निश्चित हो सलता हैं कि गर्भ में डाउन
सिंड्रोम हैं यह नहीं |
11.
क्या ट्रिपल यह क्वाड्रिपल टेस्ट का यह मतलब हैं कि गभ्स्थ
शिशु को डाउन सिंड्रोम हैं ?
नहीं , पॉजिटिव
(Positive) टेस्ट सिर्फ यह बतलाता हैं कि आपके बच्चे में डाउन सिंड्रोम का
खतरा ज्यादा हैं |
12.
पॉजिटिव (Positive) टेस्ट होने पर क्या सलाह दी जायेगी?
पॉजिटिव (Positive)
टेस्ट होने पर एक टेस्ट अमनीयोसेंटेसिस की जायेगी, जिससे गर्भ से पानी निकलकर
जाँच की जायेगी | इस पानी से गुणसूत्रों की जाँच होती हैं | इस जाँच को कैरियोटाईपिंग (Karyotyping) कहते हैं. इस जाँच से
डाउन सिंड्रोम (21 गुणसूत्रों की खराबी) के अलावा अन्य गुन्सुत्रो की खराबियो का
भी पता चल सकता हैं | इस जाँच की रिपोर्ट सिर्फ 2 हफ्ते में उपलब्ध होती हैं |
पानी के छोटे से हिस्से में सिर्फ 21वें गुणसूत्र या 21,13,18 गुणसूत्रों की
फिश (Fish) नाम जाँच की जा सकती हैं | इस जाँच का यह फायदा हैं कि इसकी 2-4 दिन
में मिल सकती हैं | अगर गर्भ 15-19 हफ्ते का हो तब फिश जाँच का विशेष महत्व हैं,
क्योंकी 20 हफ्ते तक डाउन सिंड्रोम की रिपोर्ट पता करना आवश्यक हैं |
13.
क्या अमनीयोसेंटेसिस खतरनाक हैं?
अमनीयोसेंटेसिस
एक आसान सा टेस्ट हैं, जिससे लगभग 5 मिनट का समय लगता हैं | आम तौर पर इससे माँ या
गर्भ को कोई खतरा नहीं होता हैं | इस टेस्ट के बाद गर्भपात होने की सम्भावना 0.5
प्रतिशत हैं |
14.
अमनीयोसेंटेसिस टेस्ट का व्यय (Cost) कितना होता हैं ?
इस टेस्ट के
लिए 13,000 /- से 15,000 /- रूपए खर्च होता हैं और इसकी रिपोर्ट 2 से 3 हफ्ते में
उपलब्ध हो जाती हैं | जल्दी रिपोर्ट के लिए फिश टेस्ट करने के लिए 5000 /- रूपए
अतिरिक्त खर्च होता हैं |
15.
क्या नेगेटिव ट्रिपल टेस्ट का यह मतलब हैं की बच्चे को डाउन
सिंड्रोम नहीं हैं ?
ट्रिपल टेस्ट
से ज्यादातर गर्भ में पल रहे डाउन सिंड्रोम बच्चे का पता लग जाता हैं | नेगेटिव
टेस्ट के बाद डाउन सिंड्रोम क गर्भ का गर्भपात कर सकते हैं |
16.
अगर पेट के बच्चे में डाउन सिंड्रोम का निदान पक्का हो गया,
तो उसका ईलाज क्या हैं ?
डाउन सिंड्रोम
के बच्चे मंद्बुधि/ मानसिक रूप से विकलांग होते हैं | मंद्बुधि का कोई ईलाज नहीं
हैं | अगर माता – पिता कहते हैं थो डाउन सिंड्रोम के गर्भ का गर्भपात कर सकते हैं
|
17.
क्या ट्रिपल टेस्ट और अमनीयोसेंटेसिस सही होने से मेरा
बच्चा स्वस्थ पैदा होगा ?
ट्रिपल टेस्ट
और अमनीयोसेंटेसिस से गर्भस्थ शिशु म्विन डाउन सिंड्रोम का पता लग जाता हैं अगर वे
सही हैं तो बच्चे में डाउन सिंड्रोम नहीं हैं | परन्तु इससे यह यह प्रमाणित नहीं
होता हैं की बच्चे में कोई अन्य अनुवांशिक बिंरी या अंगों में विकार नहीं हैं |
18.
क्या मझसे अपना ट्रिपल टेस्ट, क्वाड्रिपल टेस्ट यह 11 हफ्ते
की डाउन सिंड्रोम के लिए जाँच करानी चाहिए ?
यह अप पर
निर्भर करता हैं कि यह टेस्ट करवाने चाहिए या नही |
19.
अगर मेरी उम्र 35 वर्ष से ज्यादा हैं , तो क्या करना
चिहिये?
अगर आपकी उम्र
35 वर्ष से ज्यादा हैं थो आप बिना ट्रिपल टेस्ट के अमनीयोसेंटेसिस करवा सकते हैं |
ट्रिपल टेस्ट केवल एक स्क्रीनिंग टेस्ट हैं | इससे आप डाउन सिंड्रोम होने की
सम्भावना 100% नहीं कर सकतें हैं |
गुणसूत्र सम्बंधित रोग
सम्बंधित रोग
होने की सम्भावना जीवित बच्चे स्टील बर्थ (फ्रेश इंट्रा यूटेराइन डेथ) एवं सूत्र
सम्बंधित रोगों की सम्भावना 5 से 10%
क्रम
1 :
800
1 :
8000
1 :
20,000
1 :
5000
1 : 1000
1 : 1000
1 :
1000
एक गुणसूत्र संबधित रोग हैं | जाँच 1866 में सर्वप्रथमडाउन सिंड्रोम का विवरण
में गुन्सुत्रो की संख्या 46की जगह 47 हो गई | 1 से 22 याक हर गुणसूत्र संख्या में
2 होते
डाउन सिंड्रोम बच्चों ला IQ दिमागी
स्तर लगभग 40-50% होता हैं | इन बच्चों में जन्मजात ह्रदय रोइग (एन्डोकॉर्डियल
कुशन डिफेक्ट), वेट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट, ट्रेटालोजी ऑफ़ फेलेट्स ,
ड्रयुडीनल एट्रेजिआ, एनल एट्रेजिआ, रक्त
कैंसर, ह्य्पोथायरोडीज्म, अटलानओ एक्सिअल जॉइंट डिसलोकेशन, टेस्टटीस का पेट में ही
रहना एवं संक्रामक रोग होने की सम्भावना अधिक होती हैं | इन बच्चों का कद छोटा
होता हैं | जबकि डाउन सिंड्रोम के पुरुष प्रजनन क्षमता विहीन होते हैं जबकि डाउन सिंड्रोम वाली स्त्री बच्चे पैदा के
सकती हैं | इनमें पुनः डाउन सिंड्रोम की सम्भावना लगभग 50% होती हैं | जैसे-जैसे
माँ की उम्र बढती हैं, वैसे-वैसे बच्चे में डाउन सिंड्रोम की सम्भावना बढ़ती हैं |
माँ की उम्र डाउन
सिंड्रोम की सम्भावना
20 1
: 1925
25 1
: 1208
30 1
: 999
35 1
: 365
40 1
: 110
45 1 : 32
गुन्सुत्रो सम्बंधित बीमारियों से बचाव कैसे संभव हैं ?
गर्भ में विकशित हो रहे बचे की 11 से 13 सप्ताह के समय screeing test द्वारा जाँच करके बचाव किया जा सकता हैं |
जाँच किसको करवानी चाहिए ?
1.
गर्भवती महिला की उम्र 35 वर्ष से जायदा हो |
2.
पहले बच्चे में गुणसूत्र सम्बंधित रोग हो |
3.
हर गर्भवती महिला जो कि एक स्वस्थ शिशु को जनम देना चाहती
हैं वह भी अपनी इच्छा से Screeing Test करवा सकती हैं |
4. बार – बार गर्भपात या गर्भ में ही शिशु की मृत्यु हो जाये |
गर्भस्थ शिशु में डाउन सिंड्रोम होने की सम्भावना की जाँच
गर्भस्थ शिशु
में डाउन सिंड्रोम (ट्रइसोमी) होने की सम्भावना का रक्त में “ बायोकैमिकल
मार्कर्स“ व सोनोग्राफी में “सॉफ्ट मार्कर्स” की संयुक्त गणना कर पता लगया जा सकता
हैं |
+ रक्त जाँच :
1. डबल मार्कर टेस्ट ( Free BHCG+ PAPP-A) यह
टेस्ट गर्भावस्था के 10 से 13 सप्ताह के समय किया जाता हैं |
2. ट्रिपल मार्कर टेस्ट (MS-AFP+HCG+UE3) यह
टेस्ट गर्भावस्था के 15 से 20 सप्ताह के समय किया जाता हैं |
+ सोनोग्राफी
1.
NT SCAN: यह गर्भवस्था के 11से 13 सप्ताह के समय सोनोग्राफी द्वारा
गर्भस्थ शिशु में न्युकल थिकनेस (गर्दन के पीछे की सूजन), नाक की हड्डी, फेसिओ मेक्सिलरी
एंगल, डक्टस वेन में रिवर्सल फ्लो व ट्रईकस रिगजिटेशन के होने की जाँच की जाती हैं
|
2.
Anomaly
Scan (TIFFA) 3-D, 4D: सोनोग्राफी द्वारा गर्भस्थ शिशु में किसी भी तरह की विकृति
की व सॉफ्ट मार्कर्स की जाँच की जाती हैं |
RISK CALCULATION
1.
11 से 13 सप्ताह: माँ की आयु, NT Scan व डबल मार्कर की
रिपोर्ट को कंप्यूटर सॉफ्टवेर द्वारा ‘डाउन सिंड्रोम’ और ट्रइसोमी होने की संभवना
(Risk) का पता लगया जाता हैं | यदि यह रिस्क 1:50 (Screen Positive) से ज्यादा
होती हैं तो CVS ( गर्भस्थ शिशु के आंवल के टिश्यू को पतली सुई द्वारा निकलना )
द्वारा क्रोमोसोम्स की जाँच की जाती हैं |
2.
16 से 18 सप्ताह: गर्भवस्था की द्वितीय त्रिमाही में ट्रिपल
मार्कर व Anomly Scan (TIFFA 3-D, 4-D कलर सोनोग्राफी) में Soft marker
द्वारा Risk calculation की जाती हैं | 1:250 (Screen Positive) से
अधिक रिस्क आने पर Amniocentesis (गर्भस्थ शिशु की थेली में से पतली सुई
द्वारा पी निकलना ) द्वारा क्रोमोसोम्स की जाँच की जाति हैं |
रिपोर्ट में ट्रइसोमी आने पर गर्भपात कराया जा सकता हैं जो
कि 20 सप्ताह से पहले ही संभव हैं |
क्या यह जाँच सभी
गभवती महिलाओं का करवाना जरुरी हैं ?
हाँ, क्यूंकि
1.
75% डाउन सिंड्रोम बेबी यंग मोठेर्स व प्रथम वर गर्भधारण (Primi)
करने वाली गर्भवती स्त्री में होते हैं |
2.
भारत में हर वर्ष 21,400 डाउन सिंड्रोम बेबी पैदा होते जो
समाज व परिवार का बोज बढ़ाते हैं | जाँच करवाकर समय पर गर्भपात करवा देने से न केवल
इन बच्चों को पैदा होने से बचाया जा सकता हैं अपितु परिवार, समाज एवं राष्ट्र पर
पड़ने वाले अनावश्यक बोझ को कम किया जा सकता हैं |
3.
रक्त जाँच व सोनोग्राफी द्वारा जाँच करा कर Risk
Assessment किया जा सकता हैं जो की Non Navasive हैं |
